अपना अपना रास्ता है कुछ नही, क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही, जुस्तजू है एक मुसलसल जुस्तजू, क्या कही कुछ खो गया है कुछ नही, मोहर मेरे नाम की हर शय पे है, मेरे घर मे मेरा क्या है कुछ नही, कहने वाले अप… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामktheleo wrote 5 months ago: मै अपने आप से कभी घबराता नहीं, पर खाम्खां सरे आईना यूंहीं जाता नहीं. चापलूसी,बेईमानी,और दगा, ऐसा कोई … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हमारे आसपास हर कोई सच की तलाश में जुटा लगता है। महान संत, ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि वे सत्य की खोज मे … more →
mehhekk wrote 2 years ago: आईना देखती हूँ हर रोज़,आईने में अपने आप को खुश होती हूँ देखकर बाहरी रूप इतने अरसो बाद भी वैसा ही है, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: अपना अपना रास्ता है कुछ नही, क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही, जुस्तजू है एक मुसलसल जुस्तजू, क्या कह … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर नज़र से पिला दीजिये, होश मेरे उड़ा दीजिये, छोडिये बर्ह्मी की रविश, अब जरा मुस्कुरा दीजिये, बात अफ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरा चेहरा है आईने जैसा, क्यो न देखू है देखने जैसा, तुम कहो तो मैं पूछ लू तुमसे, है सवाल एक पूछने जै … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: काँटों से दामन उल्झाना मेरी आदत है, दिल मे पराया दर्द बसना मेरी आदत है, मेरा गला अगर कट जाए तो मुझ प … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: घर से निकले थे हौसला करके, लौट आए खुदा खुदा करके, हमने देखा है तज्रुबा करके, जिन्दगी तो कभी नही आए, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुस्कुरा कर मिला करो हमसे, कुछ कहा और सुना करो हमसे, बात करने से बात बढती है, रोज बाते किया करो हमसे … more →
विनय wrote 2 years ago: आज राह चलते-चलते इक आईने में अपना अक्स देखा बड़ा ग़ुरूर था मुझे खु़द पर न मैंने अपने अंदर का नक्स देख … more →
विनय wrote 2 years ago: क्यों खेलते हो? जल जाओगे! इक आग है ‘विनय’ तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो कुछ और है ‘विनय … more →