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Blogs about: आईना

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मेरा सच4 comments

ktheleo wrote 5 months ago: मै अपने आप से कभी घबराता नहीं, पर खाम्खां सरे आईना यूंहीं जाता नहीं. चापलूसी,बेईमानी,और दगा, ऐसा कोई … more →

Tags: इन्सान, नज़्म, दर्द, हैरान, सच, इश्क

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

मैं सबसे बुरा था 4 comments

विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →

Tags: मेरा गीत, अक्स, अच्छा, अफ़सोस, आदत, ख़ुशबू, ग़ैर, चाह, जज़्बात

सच से दोस्ती1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हमारे आसपास हर कोई सच की तलाश में जुटा लगता है। महान संत, ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि वे सत्य की खोज मे … more →

Tags: उलटवांसी, नवभारत टाइम्स, संजय वर्मा, सच से दोस्ती, सच, महान संत, ज्ञानी पुरुष, सत्य, कड़वा

आईना4 comments

mehhekk wrote 2 years ago: आईना देखती हूँ हर रोज़,आईने में अपने आप को खुश होती हूँ देखकर बाहरी रूप इतने अरसो बाद भी वैसा ही है, … more →

Tags: Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sher, Blogroll, Zindagi, Mirror, aks, suhana safar

क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही4 comments

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: अपना अपना रास्ता है कुछ नही, क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही, जुस्तजू है एक मुसलसल जुस्तजू, क्या कह … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Aaeena, Non Films, जगजीत सिंह, Universal

फिर नज़र से पिला दीजिये

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर नज़र से पिला दीजिये, होश मेरे उड़ा दीजिये, छोडिये बर्ह्मी की रविश, अब जरा मुस्कुरा दीजिये, बात अफ … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Aaeena, Non Films, जगजीत सिंह, Universal

तेरा चेहरा है आईने जैसा1 comment

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरा चेहरा है आईने जैसा, क्यो न देखू है देखने जैसा, तुम कहो तो मैं पूछ लू तुमसे, है सवाल एक पूछने जै … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Aaeena, Non Films, जगजीत सिंह, Universal

काँटों से दामन उल्झाना मेरी आदत है1 comment

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: काँटों से दामन उल्झाना मेरी आदत है, दिल मे पराया दर्द बसना मेरी आदत है, मेरा गला अगर कट जाए तो मुझ प … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Aaeena, जगजीत सिंह, Universal, Kanton Se Daman Uljhana

घर से निकले थे हौसला करके

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: घर से निकले थे हौसला करके, लौट आए खुदा खुदा करके, हमने देखा है तज्रुबा करके, जिन्दगी तो कभी नही आए, … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Aaeena, Non Films, जगजीत सिंह, Universal

मुस्कुरा कर मिला करो हमसे

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुस्कुरा कर मिला करो हमसे, कुछ कहा और सुना करो हमसे, बात करने से बात बढती है, रोज बाते किया करो हमसे … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Aaeena, Non Films, जगजीत सिंह, Universal

अपना अक्स देखा

विनय wrote 2 years ago: आज राह चलते-चलते इक आईने में अपना अक्स देखा बड़ा ग़ुरूर था मुझे खु़द पर न मैंने अपने अंदर का नक्स देख … more →

Tags: मेरी नज़्म, उम्मीद, रात, अक्स, सवेरा, HOPE, आँसू, Morning, Night

'विनय' इक आईना है टूटा हुआ

विनय wrote 2 years ago: क्यों खेलते हो? जल जाओगे! इक आग है ‘विनय’ तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो कुछ और है ‘विनय … more →

Tags: मेरी नज़्म, दर्द, क़रीब, Frozen, मौसम, Pain, घर, आग, विनय


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