दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपना ही वुजूद थ हाया इश्क़ क्या किया मिट गये नाम-ओ-निशां उफ़ वो जलवे हुस्न के उफ़ वो साये ज़ुल्फ़ के मुँह मे… more →
इक शायर अंजाना सा...balvantdabhade wrote 10 months ago: नमस्कार मित्रांनो आपले स्वागत आहे … more →
balvantdabhade wrote 10 months ago: नमस्कार मित्रांनो आपले स्वागत आहे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →