ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी साँस टुकड़ा अश्क़ धज्जी और गहरी तिशनगी तन्हाइयां भी साथ हैं साथ है उम्मीद भी कितनी सियाह और कितनी है सुनहरी तिशनगी तिशनगी बेवा भी है तिशनगी है शोख़ भी एक पल में ही उद… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी साँस टुकड़ा अश्क़ धज्जी और गहरी तिशनगी तन्हाइयां भी साथ हैं साथ ह … more →