‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जीता है भला कौन अदू उसका उससे लड़कर वह आँधी है जिससे बरगद का दरख़्त फटे… शायिर: विनय प्रजापति ‘न… more →
तख़लीक़-ए-नज़रHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: घुटन है दिल में बहुत, नाराज दोनो रब जहाँ प्रश्न तो सुलझा नहीं, तू कौन है और है कहां ? पी गया आंसू, ज … more →
विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जी … more →
विनय wrote 1 year ago: जब जीना लाज़मी हो जाये तो सबको सभी को मिटाके जियो क़द कभी छोटा न हो ‘नज़र’ सबको घुटनों पर झ … more →
विनय wrote 1 year ago: मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को दस्तो-सहरा बनाया ‘नज़र’ को अय्यार पेश सैय्याद बता … more →
अतुल शर्मा wrote 2 years ago: [इस आलेख को लिखने वाले स्वयं को सीटीवादक कहलाना पसंद करते हैं। यहाँ ये इसी नाम से आलेख देना चाहते है … more →