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Blogs about: आग

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कुछ पंक्तियाँ

Nidhi KM wrote 4 months ago: चलते थे जिस ज़मीं पर, संभल संभल कर हम, सरकी वही ज़मी  नये कदम उठाने के पहले, आसमान से तो पानी बरसता … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, Social, nidhi, nablopomo09, कदम, पानी, आसमान

कुछ लकीरे 8 comments

kmuskan wrote 12 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →

Tags: Zindagi, अक्स, अजनबी, आंसू, उदास, ज़िन्दगी, तस्वीर, पीड़ा, फ़रिश्ते

नफरत की आग 6 comments

kmuskan wrote 1 year ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, घर, नफरत

तेरे रेशमी बदन से4 comments

विनय wrote 1 year ago: तेरे रेशमी बदन से सरकता है यह दुप्पटा हज़ारों आहें लहू में डूबकर आग बन जाती हैं ज़ालिम तेरे तआक़ुब की य … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, बदन, अदा, Body, Fire, आह, silky, Style, cruel

दिल की लगी दिल को दिल से लगी

विनय wrote 1 year ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आग फिर न बुझी यह दिल की लगी है दिल से लगी है जब यह लगी है फिर … more →

Tags: मेरा गीत, मुहब्बत, इश्क़, Heart, Love, सावन, दिल, प्यार, ख़ुशबू

मेरी राहों की रेत पर1 comment

विनय wrote 1 year ago: मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं है वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है आज़माना ह … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, इश्क़, आतिश, Love, प्यार, मोहब्बत, Pain, वफ़ा

ख़ुदाया कभी करम मुझ पर भी

विनय wrote 2 years ago: ख़ुदाया1 कभी करम मुझ पर भी सुम्बुल2 की थोड़ी मेहर इधर भी प्यार क्या है नहीं जानता मैं मगर सिखा दे मु … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, चाँद, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, ख़बर, ख़ुदा

'विनय' इक आईना है टूटा हुआ

विनय wrote 2 years ago: क्यों खेलते हो? जल जाओगे! इक आग है ‘विनय’ तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो कुछ और है ‘विनय … more →

Tags: मेरी नज़्म, दर्द, क़रीब, Frozen, मौसम, Pain, घर, विनय, आँसू

'विनय' हूँ मैं

विनय wrote 2 years ago: मैं वो आग हूँ जो लग जाऊँ तो जंगल का तिनका-तिनका जला दूँ फैल जाऊँ चंद लम्हों में कुछ इस तरह जैसे आग क … more →

Tags: मेरी नज़्म, Moment, तूफ़ान, विनय, लम्हा, thunder, whirl, Fire, तिनका

चाहे मुझे पागल करार दिया जाए27 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: चाहे मुझे पागल करार दिया जाए (a poem by ravi kumar, rawatbhata) कोई यदि पूछेगा सबसे बेहतर रंग कौनसा … more →

Tags: कविताएं, रोटी, मिट्टी, पसीना, आवाज़, पागल


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