द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावार्थ-मनुष्य के हृदय में अगर किसी के प्रति द्वेष भाव का निर्माण होता है तो-भले ही वह साधु या विद्वान ह… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ माँगने उसकी माँ के पास पहुँचा तब वह गुस्से में बोली ‘तुम्हारे प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस आदमी ने मशहूर लेखक पर अनेक पत्थर फैंके हर बार यही कहता कि ‘यह तेरे उन शब्दों का बदला है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन्त्री जी ने मीटिंग में अपने सचिव से कहा’- इस बार के वार्षिक पुरस्कार के लिये ऐसे लेखक का … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कोई भी धर्म अपने अनुयायियों के विश्वास के बिना नहीं चल सकता , और उसके मुखिया अपना प्रभुत्व जमाने क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पैसा है तो पाने के लिये प्यार है पद है तो खाने के लिये पकवान है प्रतिष्ठा है तो पहचान है राजा ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो दूसरे का दिल दुखाकर अपने अपनी लिये सुख का अंबार लगाते हैं वही अपनी जिंदगी की नाव दु:ख की मझ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ऐसा लगता है कि हमने पाश्चात्य सभ्यता को अपनाया पर कुछ लेट हो गये और यही कारण है कि कहीं न तो स्व … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वाह रे बाज़ार तेरा खेल मैदान में पिटे हीरो को कागज और फिल्म पर चमकाकर और सजाकर जनता के बीच देता है ठ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आँखें देखतीं हैं कान सुनते हैं और जीभ का काम है बोलना पर जो पहचान करे सुनकर जो गुने और जो श्रीमुख से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बच गया हेरी पॉटर लोग जश्न मनाते हुए किताब खरीदने के लिए दुकानों पर लाईन में खडे हैं अपनी हकीकतों से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जनसँख्या में लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या कम रह गयी है लडकी की भ्रूण में ही ह्त्या की क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आजकल जिसे देखो अपने लोगों-यानी अपने रिश्तेदारों , परिचितों, मित्रों और परिवार -पर यकीन नहीं करता । … more →
योगेन्द्र wrote 7 months ago: (नवंबर २० की पोस्ट के आगे) वस्तुतः तथाकथित धर्मरक्षकों की चिंता धर्म को परिभाषित करने और उसमें जनसमु … more →
योगेन्द्र wrote 7 months ago: (नवंबर 2 की पोस्ट के आगे) करीब दो सप्ताह पहले मैंने ‘विहिप’ के ‘फरमान’, (उसे आप आदेश, अनुरोध, सलाह, … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इतने भारी शरीर वाला हाथी छोटे से अंकुश सा वश में किया जाता है. सब जानते हैं की अंकुश परिमाण में हा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: स्वारथ सूका लाकडा, छाँह बिहूना सूल पीपल परमारथ भजो, सुख सागर को मूल संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं क … more →