लघुकथा एकलव्य ‘नानाजी! एकलव्य महान धनुर्धर था?’ - ‘हाँ; इसमें कोई संदेह नहीं है.’ - ‘उसने व्यर्थ ही भोंकते कुत्तों का मुंह तीरों से बंद कर दिया था ?’ -’हाँ बे… more →
मंथनमहावीर wrote 1 month ago: लघुकथा एकलव्य ‘नानाजी! एकलव्य महान धनुर्धर था?’ - ‘हाँ; इसमें कोई संदेह नहीं है. … more →
महावीर wrote 4 months ago: लघुकथा शिष्टता प्राण शर्मा किसी जगह एक फिल्म की शूटिंग हो रही थी. किसी फिल्म की आउटडोर शूटिंग हो वहा … more →
महावीर wrote 4 months ago: ।।लघुकथा ।। जन नायक प्राण शर्मा अपने आपको प्रतिष्ठित समझने वाले गुणेन्द्र प्रसाद के मन में एक अजीब-स … more →