आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती अब वो पहले सी राहत नहीं मिलती हम ही हैं जिसको नसीब हिज्र है सब को शब-ए-फ़ुरक़त नहीं मिलती इश्क़ से धुल गया है सारा जहाँ किसी से किसी की सूरत नहीं मिलती आँख चुराते हैं और चले जा… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती अब वो पहले सी राहत नहीं मिलती हम ही हैं जिसको नसीब हिज्र है सब को शब-ए-फ़ु … more →