आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म से मै ड़रता नहीं जैसी भी रही ज़िंदगी मुँह कभी मोड़ा नहीं रात कि महफ़िल सजी थी, चाँद का गिलास था ग़म पिये त… more →
इक शायर अंजाना सा...Gayatri wrote 5 months ago: वक़्त किसका हुआ बोलो वक्त ने साथ किसका दिया न वो माझी का हो पाया न होगा आते कल का ….. * वक़्त … more →
Nidhi KM wrote 6 months ago: आज फिर मन उदास है, कोई अपना नही पास है… चल रही हूँ जिन रहो मे, कभी … more →
aspundir wrote 8 months ago: आज का दिन कैसा बीतेगा पंचांग से वर्त्तमान नक्षत्र ज्ञात करें। फिर दिए गये चक्र के समान एक चक्र बनाय … more →
विनय wrote 1 year ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता क्यों? ढल रहा हूँ दि … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आज है वो कुछ उदास उदास से न जाने क्यों नही दे देते ये उदासी मुझे वो आज है वो कुछ रूठे रूठे से न जाने … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आपको अब भी बहुत कुछ देखना है आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है चाँद तक जाने की राहें खोज लीं दिल से दिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला दैरोहरम भटका किया, दिलेबेख़बर में खुदा मिला जिस मोड़ से मै ब … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक समझा नहीं मै क्यों गया तू छोड़कर क्या कमी थी प्यार में रिश्ते गया सब तोड़कर देख तू आ के ज़रा मेरी … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है कोई साज़ नहीं है कानों में शहनाई सी है हाय तमाशा क्या लगा है … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: अश्क़ गिनता है मेरे आज मुनाफ़े की तरह ज़िंदगी आँखों से गुज़रती है जनाज़े की तरह आज वो ही दर मुझे लगता है … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया मै ज़िंदगी से और आशना हो गया दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै दुश्मनों … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना ब … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: रिश्ता ये कैसा है नाता ये कैसा है, पहचान जिस से नहीं थी कभी, अपना बना है वही अजनबी, रिश्ता ये कैसा ह … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर आज मुझे तुमको बस इतना बताना है, हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है, मधुबन हो या गुलशन हो पतझड़ हो … more →