फूल तो खिल रहे हैं बाग़ में, पर मुझे उनका सौंदर्य रिझाता नहीं, चाँद की चाँदनी में लगे है तपिश, तारों का जमघट लुभाता नहीं। जो नज़ारे कभी लगते थे मनोहर , उनका दिखना भी सुहाता नहीं, ये क्या हो गया है इंसान… more →
पसंदरवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 days ago: शहंशाह, भेड़िये और आतंक – शिवराम ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समू … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: फूल तो खिल रहे हैं बाग़ में, पर मुझे उनका सौंदर्य रिझाता नहीं, चाँद की चाँदनी में लगे है तपिश, तारों … more →
अनिल कुमार wrote 1 year ago: आतंकवादी का साथ देने वाले अकसर उसे लड़ाका कहकर संबोधित करते हैं. Terrorists are often called militant … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: विश्व की समस्याओं की विषय-सूची में आतंकवाद प्रथम नंबर पर है। यूँ तो आस्ट्रिया के विरुद्ध सर्बों का स … more →