विनय wrote 1 year ago: हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का शाय … more →
विनय wrote 1 year ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं है वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है आज़माना ह … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - … more →
विनय wrote 1 year ago: आतिशे-दोज़ख़ का सोज़ है दिल में आहो-फ़ुगाँ खा़मोश है दिल में मैं दीदारे-दिलनशीं को बेताब हूँ क़लक़ इक हनो … more →