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Blogs about: आत्मकथा

वो कवितायें, जो मुझे प्रिय रही हैं !12 comments

डा. अमर कुमार wrote 3 months ago: अब तक आपने पढ़ा.. “ वायसराय ने जब हम काकारी के मृत्युदण्ड वालों की दया प्रार्थना अस्वीकार की थी, उसी … more →

Tags: अंतिम समय की बातें, खण्ड-4, चँद शेर, उस पथ में, गाँधी, गोरखपुर जेल, जननि तेरी जय हो, तिलक, बिघ्न और बाधा

गये थे रोजा छोड़ने नमाज गले पड़ गई ।4 comments

डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा.. “ यह जानते हुए कि अंगेज सरकार कुछ भी न सुनेगी, मैंने सरकार को प्रतिज्ञा पत्र ही क्य … more →

Tags: अंतिम समय की बातें, आत्म-चरित, खण्ड-4, अशफ़ाकउल्ला खाँ, आर्डिनेन्स, काकोरी षड़यन्त्र, खुफ़िया पुलिस, प्रतिज्ञापत्र, बिस्मिल

राजनीति एक शतरंज के खेल के समान है ।5 comments

डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा…  उनको  उचित  है कि अधिक से अधिक अंग्रेजी के दसवें दर्जें तक की योग्यत … more →

Tags: आत्म-चरित, खण्ड-4, देश की दुर्व्यवस्था, काकोरी कांड, देशसेवा, बिस्मिल, षड़यन्त्रकारी, bismil, Martyr of Indian Independence

मैजिक लालटेन द्वारा तस्वीरें दिखाकर या…6 comments

डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा… “ इसी कारण महामना देशबन्धु चितरंजन दास ने अन्तिम समय ग्राम संगठन ही अपने जीवन का ध्य … more →

Tags: खण्ड-4, देश की दुर्व्यवस्था, खद्दरधारी, मैज़िक लालटेन, सामाचार पत्र, स्वदेश भक्त, bismil, Martyr of Indian Independence, pre-independent india

यह कैसा भारतवर्ष है2 comments

डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा … “ मैं इस समय इस परिणाम पर पहुंचा हूं कि यदि हम लोगों ने प्राणपण से जनता को शिक्षित … more →

Tags: खण्ड-4, देश की दुर्व्यवस्था, अछूत, असहयोग आन्दोलन, किसान, बिस्मिल, Deshbandhu Chittranjan Das, Freedom Struggle of India, pre-independent india

उन्हीं के साथ विश्वासघात कर के निकल भागूँ ?3 comments

डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: पिछली कड़ी में..निश्चित किया कि अब भाग चलूं । पाखाने के बहाने से बाहर निकाला गया । एक सिपाली कोतवाली … more →

Tags: इतिहास में हमारे प्र, खण्ड-4, आजादी, कटी हुई सलाखों, कृ्षकों का संगठन, कोतवाली की हवालात, देवता के समान, पंo चम्पालाल जी, भारत की भावी सन्तान

अच्छा हुआ जो मैं गिरफतार हो गया और भागा नही3 comments

डा. अमर कुमार wrote 6 months ago: अब विचारने की बात यह कि भारतवर्षमें क्रान्तिकारी आन्दोलन के समर्थक कौन से साधन मौजूद है ?  गत पृष्ठो … more →

Tags: खण्ड-4, सरफ़रोशी की तमन्ना, अशफ़ाकउल्ला खाँ, अख़बार, कोतवाली, क्रांतिकारी दल, गिरफतारी, रामप्रसाद 'बिस्मिल', रोशन सिंह

अशफ़ाकउल्ला ख़ाँ वारसी : अन्तिम समय में दो शब्द7 comments

डा. अमर कुमार wrote 6 months ago: नमस्कार ! एक  अँतराल  के  पश्चात  यह  कड़ियाँ  प्रारँभ  करने  का  मन बनाया है । किसी हुतात्मा की अवमा … more →

Tags: आत्म-चरित, काकोरी के शहीद, खण्ड-4, सरफ़रोशी की तमन्ना, अशफ़ाकउल्ला खाँ, क्रान्तिकारी आन्दोल, दे्श पर, फांसी की सजा, मातृभूमि

अन्तिम समय की बातें6 comments

डा. अमर कुमार wrote 8 months ago: मैं भी तो अल्पज्ञ जीव मात्र ही हूं  :  श्री बिस्मिल की इस स्वीकारोक्ति में मेरी असहमति का कोई स्थान … more →

Tags: अंतिम समय की बातें, खण्ड-4, चँद शेर, अन्तिम समय, इंग्लैण्ड, क्रांतिकारी दल, चतुर्थ खण्ड, परिस्थितियों के अनु, पश्चाताप

मैं मन ही मन घुटा करता5 comments

डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया,  जिसमें तीन डाक्टर थे । उन बुद्धू की जब कुछ समझ में न आया, तो यह कह दिया … more →

Tags: आत्म-चरित, खण्ड-4, अनशन व्रत, कविवर रवीन्द्र नाथ, काकोरी षड़यन्त्र, कैदियों का भोजन, क्रान्तिकारी दल, चतुर्थ खण्ड, दुश्मन

जेल और भेद जानने का प्रयत्न4 comments

डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: मैं गिरफ़्तार हो गया । मैं केवल एक अंगोछा पहने हुये था । पुलिस वालों को अधिक भय न था । पूछा यदि घर मे … more →

Tags: आत्म-चरित, खण्ड-4, कप्तान साहब, कानून, खुफिया पुलिस, गिरफतारी, चालबाजी, दुनियादारी, बनारसी लाल

मैं गिरफ़्तार हो गया2 comments

डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: नवयुवकों का भी उत्साह बढ़ गया । जितना कर्जा था निपटा दिया । अस्त्रों की खरीद के लिये लगभग एक हजार रूप … more →

Tags: आत्म-चरित, काकोरी षड़यंत्र, खण्ड-4, अनुभवहीनता, अनुसन्धान, आस्तीन में सांप, काकोरी डकैती, खुफिया पुलिस, गिरफ़्तारी

रेलवे डकैती5 comments

डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: इन कठिनाइयों के बाद भी…. इस दल ने विदेश से अस्त्र प्राप्त करने का बड़ा उत्तम सूत्र प्राप्त किया … more →

Tags: काकोरी षड़यंत्र, आत्म-चरित, खण्ड-4, सहारनपुर, चतुर्थ खण्ड, आर्थिक अवस्था, सरकारी माल, लूटना है, लोहे का संदूक

कार्यकर्ताओं की दुर्दशा, अशान्ति युवक दल5 comments

डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: इस वृहत संगठन में भी …  इस समय समिति के सदस्यों की बड़ी दुर्दशा थी । चने मिलना भी कठिन था । सब … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्म-चरित, खण्ड-4, चतुर्थ खण्ड, कार्यकर्ता, किंकर्तव्य विमूढ़, पंडित जी अब क्या करें, बंगाल आर्डिनेन्स, भूखों मर रहे हैं

नौकरी, व्यवसाय तथा वृहत् संगठन2 comments

डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: इन चालबाजारियों के चलते….  अब सब ओर से चित्त को हटा कर बड़े मनोयोग से नौकरी में समय व्यतीत करने … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्म-चरित, खण्ड-4, भारतवर्ष, चतुर्थ खण्ड, कार्यकारिणी, कार्यकर्ता, संगठनकर्ता, संयुक्त प्रान्त

चालबाजार1 comment

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: नोट बनाने के प्रयोगों के बाद… कई महानुभावों ने गुप्त समिति के नियमादि बना कर मुझे दिखायें । उन … more →

Tags: आत्म-चरित, खण्ड-3, सरफ़रोशी की तमन्ना, क्रांतिकारी दल, गुप्त समिति, डकैतियों, तृतीय खण्ड, नियम, पुर्नसंगठन

नोट बनाने के प्रयोग5 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: पुनर्गठन के बाद…. इसी बीच मेरे एक मित्र की एक नोट बनाने वाले महाशय से भेंट हुई । उन्होंने बड़ी- … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्म-चरित, खण्ड-3, तृतीय खण्ड, कलेजा मसोस कर, नोट बनाओ, सन्देह, फोटोग्राफी, बताना कुछ मत

पुर्नसंगठन

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: पिछली बार.. अनुभवहीनता से इस प्रकार ठोकरें खानी पड़ी । कोई पथ प्रदर्शक तथा सहायक नहीं, जिस से परामर्श … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्म-चरित, खण्ड-3, रिवाल्वर, पुलिस कप्तान, तृतीय खण्ड, कार्य निरीक्षण, वेश्या, रिवाल्वर का कुन्दा

संसार अन्धकारमय दिखाई देता था3 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: राजकीय घोषणा के पश्चात जब मैं शाहजहाँपुर आया तो शहर की अदभुत दशा देखी । कोई पास तक खड़े होने का साहस … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्म-चरित, खण्ड-3, शाहज़हाँपुर, अंगरेजी, प्रतिज्ञा, पुस्तक, तृतीय खण्ड, 500 रूपये


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