पुरबिया फुटानीबाज प्रमोद सिंह की एक कविता एक मामूली कविता की किताब एक कविता खुशी की हो, धुली लहरीली साइकिल पर चढ़कर आए, जंगले के लोहे में धंसे बच्चे का चेहरा मुस्कराहट में भर जाए. खुरपी, मटक… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 11 months ago: पुरबिया फुटानीबाज प्रमोद सिंह की एक कविता एक मामूली कविता की किताब एक कविता खुशी की हो, धुली … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: अष्टभुजा शुक्ल की एक कविता साफ़-साफ़ जो रोशनी में खड़े होते हैं वे अंधेरे में खड़े लोगों को … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: नवारुण भट्टाचार्य की एक बांग्ला कविता (हिंदी अनुवाद : अरविंद चतुर्वेद) क्रांति के बिम्ब कुछेक क … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: ज्ञान के अन्य अनुशासनों की तरह कविता भी जीवन को समझने का एक उपक्रम है, अलबत्ता अधिक आनंदप्रद उपक … more →