मुक्तिबोध (1917-1964) छायावादोत्तर प्रगतिशील कविता की एक परम्परा केदारनाथ अग्रवाल,नागार्जुन और त्रिलोचन की है तो दूसरी परम्परा के वाहक हैं मुक्तिबोध . बीसवीं सदी की हिंदी कविता का सबसे बेचैन,सबसे तड़पत… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 3 weeks ago: मुक्तिबोध (1917-1964) छायावादोत्तर प्रगतिशील कविता की एक परम्परा केदारनाथ अग्रवाल,नागार्जुन और त्रिल … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: पुरबिया फुटानीबाज प्रमोद सिंह की एक कविता एक मामूली कविता की किताब एक कविता खुशी की हो, धुली लह … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: अष्टभुजा शुक्ल की एक कविता साफ़-साफ़ जो रोशनी में खड़े होते हैं वे अंधेरे में खड़े लोगों को तो देख भ … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: नवारुण भट्टाचार्य की एक बांग्ला कविता (हिंदी अनुवाद : अरविंद चतुर्वेद) क्रांति के बिम्ब कुछेक क … more →
PRIYANKAR wrote 3 years ago: ज्ञान के अन्य अनुशासनों की तरह कविता भी जीवन को समझने का एक उपक्रम है, अलबत्ता अधिक आनंदप्रद उपक … more →