दोस्ती की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। आज तक मनोवैज्ञानिक भी इस बारे में किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। एक विचार यह है कि दोस्ती आत्मा के स्तर पर होती है। बच्चों में बड़ी जल्दी दोस्ती हो जाती… more →
उलटवांसीयोगेन्द्र जोशी wrote 4 months ago: स्वामी विवेकानंद के उपदेशात्मक वचनों में एक सूत्रवाक्य विख्यात है । वे कहते थे: “उत्तिष्ठत जाग्रत प् … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लिय … more →
kmuskan wrote 1 year ago: कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारत … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: दोस्ती की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। आज तक मनोवैज्ञानिक भी इस बारे में किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: इस देश में आध्यात्म को लेकर दो धाराएं सदैव रहीं हैं. एक तो निर्गुण और निराकार ईश्वर की आराधना की प्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: राम अगर मिथक हैं तो यहाँ सत्य कौन है? शायद इस बात का उत्तर वह लोग भी नहीं दे सकते जो राम को मिथक मान … more →