कब से अरमान ज़िन्दगी के जगा रहा हूँ, कब से उसे मैं बिन रुके बुला रहा हूँ, कब से इंतज़ार है उसके आने का, कब से विचार है उसमें डूब जाने का, कब से आरज़ू है उसकी आवाज़ में खो जाने की, कब से चाहत है उसकी च… more →
आत्मियताpalakmathur wrote 4 months ago: कब से अरमान ज़िन्दगी के जगा रहा हूँ, कब से उसे मैं बिन रुके बुला रहा हूँ, कब से इंतज़ार है उसके आने … more →
palakmathur wrote 5 months ago: कुछ अरमान इस दिल के, तनहा जीवन से तन्हाई मिटाने के ख़्वाब, कुछ चाहत उसे पाने की, थोड़ी आरज़ू उसमे खो … more →
palakmathur wrote 5 months ago: दर्द कितना है दिल में न जान पाओगे, हम रोज़ अपने ग़म का इश्तेहार नहीं करते, जो आँख से टपकें लहू तो बत … more →