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Blogs about: आत्म चरित

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गये थे रोजा छोड़ने नमाज गले पड़ गई ।4 comments

डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: अब तक आपने पढ़ा.. “ यह जानते हुए कि अंगेज सरकार कुछ भी न सुनेगी, मैंने सरकार को प्रतिज्ञा पत्र ही क्य … more →

Tags: अंतिम समय की बातें, आत्मकथा, खण्ड-4, अशफ़ाकउल्ला खाँ, आर्डिनेन्स, काकोरी षड़यन्त्र, खुफ़िया पुलिस, प्रतिज्ञापत्र, बिस्मिल

राजनीति एक शतरंज के खेल के समान है ।5 comments

डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: अब तक आपने पढ़ा…  उनको  उचित  है कि अधिक से अधिक अंग्रेजी के दसवें दर्जें तक की योग्यत … more →

Tags: आत्मकथा, खण्ड-4, देश की दुर्व्यवस्था, काकोरी कांड, देशसेवा, बिस्मिल, षड़यन्त्रकारी, bismil, Martyr of Indian Independence

इतिहास को हमारे प्रयत्नों का उल्लेख करना ही पड़ेगा6 comments

डा. अमर कुमार wrote 7 months ago: ऐतिहासिक दृष्टि से हम लोगों के कार्य का बहुत बड़ा मूल्य है । जिस प्रकार भी हो, यह तो मानना ही पड़ेगा … more →

Tags: अंतिम समय की बातें, इतिहास में हमारे प्र, खण्ड-4, सरफ़रोशी की तमन्ना, अराजकता, कार्यकारिणी, क्रान्तिकारी आन्दोल, भारतवर्ष, राजनीति

फांसी की कोठरी है या, साधना की गुफा10 comments

डा. अमर कुमार wrote 7 months ago: फांसी की कोठरी अन्तिम समय निकट है । दो फांसी की सजायें सिर पर झूल रहा है । पुलिस को साधारण जीवन में … more →

Tags: खण्ड-4, चँद शेर, फाँसी, सरफ़रोशी की तमन्ना, काला पानी, कोठरी, गोरखपुर जेल, प्राणत्याग, फांसी की सजा

अशफ़ाकउल्ला ख़ाँ वारसी : अन्तिम समय में दो शब्द7 comments

डा. अमर कुमार wrote 7 months ago: नमस्कार ! एक  अँतराल  के  पश्चात  यह  कड़ियाँ  प्रारँभ  करने  का  मन बनाया है । किसी हुतात्मा की अवमा … more →

Tags: आत्मकथा, काकोरी के शहीद, खण्ड-4, सरफ़रोशी की तमन्ना, अशफ़ाकउल्ला खाँ, क्रान्तिकारी आन्दोल, दे्श पर, फांसी की सजा, मातृभूमि

माशूक के थोड़े से भी एहसान बहुत है7 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: तलवार ख़ूँ में रंग लो, अरमान रह न जाये । बिस्मिल के सर पे कोई अहसान रह न जाये ।। अब आगे पृष्ठ 131 से … more →

Tags: खण्ड-4, चँद शेर, अदालत, काकोरी डकैती, क्रान्तिकारी समिति, गवाही, चतुर्थ खण्ड, जेल, परमात्मा

तलवार ख़ूँ में रंग लो, अरमान रह न जाये9 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: उसने अपना बयान दे दिया और वह सरकारी गवाह बना लिया गया । यह कुछ अधिक जानता था । उसके बयान से क्रान्ति … more →

Tags: काकोरी के शहीद, खण्ड-4, अशफाक उल्ला खां, चन्द्रशेखर आजाद, दक्षिणेश्वर बम केस, बंगाल आर्डीनेन्स, बनवारी लाल, बनारस षड़यन्त्र, मर्यादा की रक्षा

अभियोग वा सन्देह5 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: मैंने नमस्ते कर उत्तर दिया कि आप के चरणों की कृपा है । क्योंकि इस मुकद्में के पहले मैंने किसी अदालत … more →

Tags: काकोरी षड़यंत्र, खण्ड-4, अन्तरात्मा, क्रान्तिकारी समिति, गिरफ़्तारी, चतुर्थ खण्ड, बनारसीलाल, रामप्रसाद 'बिस्मिल', शाहजहांपुर

मैं मन ही मन घुटा करता5 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया,  जिसमें तीन डाक्टर थे । उन बुद्धू की जब कुछ समझ में न आया, तो यह कह दिया … more →

Tags: आत्मकथा, खण्ड-4, अनशन व्रत, कविवर रवीन्द्र नाथ, काकोरी षड़यन्त्र, कैदियों का भोजन, क्रान्तिकारी दल, चतुर्थ खण्ड, दुश्मन

प्रलोभन, शिनाख़्त तथा बनवारीलाल2 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: बनारसीलाल के सम्बन्ध में सब मित्रों ने कहा था कि इस से अवश्य धोखा होगा, पर मेरी बुद्धि में कुछ न समा … more →

Tags: काकोरी षड़यंत्र, खण्ड-4, इण्डियन डेली टेलीग्, गिरफ़्तारी, चतुर्थ खण्ड, बंगला, बनवारीलाल, मरणासन्न, मेडिकल बोर्ड

जेल और भेद जानने का प्रयत्न4 comments

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: मैं गिरफ़्तार हो गया । मैं केवल एक अंगोछा पहने हुये था । पुलिस वालों को अधिक भय न था । पूछा यदि घर मे … more →

Tags: आत्मकथा, खण्ड-4, कप्तान साहब, कानून, खुफिया पुलिस, गिरफतारी, चालबाजी, दुनियादारी, बनारसी लाल

मैं गिरफ़्तार हो गया2 comments

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: नवयुवकों का भी उत्साह बढ़ गया । जितना कर्जा था निपटा दिया । अस्त्रों की खरीद के लिये लगभग एक हजार रूप … more →

Tags: आत्मकथा, काकोरी षड़यंत्र, खण्ड-4, अनुभवहीनता, अनुसन्धान, आस्तीन में सांप, काकोरी डकैती, खुफिया पुलिस, गिरफ़्तारी

रेलवे डकैती5 comments

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: इन कठिनाइयों के बाद भी…. इस दल ने विदेश से अस्त्र प्राप्त करने का बड़ा उत्तम सूत्र प्राप्त किया … more →

Tags: काकोरी षड़यंत्र, आत्मकथा, खण्ड-4, सहारनपुर, चतुर्थ खण्ड, आर्थिक अवस्था, सरकारी माल, लूटना है, लोहे का संदूक

कार्यकर्ताओं की दुर्दशा, अशान्ति युवक दल5 comments

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: इस वृहत संगठन में भी …  इस समय समिति के सदस्यों की बड़ी दुर्दशा थी । चने मिलना भी कठिन था । सब … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्मकथा, खण्ड-4, चतुर्थ खण्ड, कार्यकर्ता, किंकर्तव्य विमूढ़, पंडित जी अब क्या करें, बंगाल आर्डिनेन्स, भूखों मर रहे हैं

नौकरी, व्यवसाय तथा वृहत् संगठन2 comments

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: इन चालबाजारियों के चलते….  अब सब ओर से चित्त को हटा कर बड़े मनोयोग से नौकरी में समय व्यतीत करने … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, आत्मकथा, खण्ड-4, भारतवर्ष, चतुर्थ खण्ड, कार्यकारिणी, कार्यकर्ता, संगठनकर्ता, संयुक्त प्रान्त

चालबाजार1 comment

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: नोट बनाने के प्रयोगों के बाद… कई महानुभावों ने गुप्त समिति के नियमादि बना कर मुझे दिखायें । उन … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, खण्ड-3, आत्मकथा, रिवाल्वर, गुप्त समिति, प्रयाग, तृतीय खण्ड, भयंकर परिणाम, क्रांतिकारी दल

नोट बनाने के प्रयोग5 comments

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: पुनर्गठन के बाद…. इसी बीच मेरे एक मित्र की एक नोट बनाने वाले महाशय से भेंट हुई । उन्होंने बड़ी- … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, खण्ड-3, आत्मकथा, तृतीय खण्ड, कलेजा मसोस कर, नोट बनाओ, सन्देह, फोटोग्राफी, बताना कुछ मत

पुर्नसंगठन

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: पिछली बार.. अनुभवहीनता से इस प्रकार ठोकरें खानी पड़ी । कोई पथ प्रदर्शक तथा सहायक नहीं, जिस से परामर्श … more →

Tags: आत्मकथा, खण्ड-3, सरफ़रोशी की तमन्ना, कार्य निरीक्षण, गोली चली, डकैती का माल, तृतीय खण्ड, पुलिस कप्तान, फांसी की सजा

संसार अन्धकारमय दिखाई देता था3 comments

डा. अमर कुमार wrote 11 months ago: राजकीय घोषणा के पश्चात जब मैं शाहजहाँपुर आया तो शहर की अदभुत दशा देखी । कोई पास तक खड़े होने का साहस … more →

Tags: सरफ़रोशी की तमन्ना, खण्ड-3, आत्मकथा, शाहज़हाँपुर, अंगरेजी, प्रतिज्ञा, पुस्तक, तृतीय खण्ड, 500 रूपये


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