माखनलाल चतुर्वेदी ‘सुजन, ये कौन खड़े है ?’ बन्धु ! नाम ही है इनका बेनाम । ‘कौन करते है ये काम ?’ काम ही है बस इनका काम । ‘बहन-भाई’, हां कल ही सुना, अहिंसा आत्… more →
हिन्दी साहित्यसंपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: माखनलाल चतुर्वेदी ‘सुजन, ये कौन खड़े है ?’ बन्धु ! नाम ही है इनका बेनाम । ‘कौन … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय” हम नदी के द्वीप है। हम नही कहते कि हमको छोड क … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: रचनाकार: सुभद्रा कुमारी चौहान आ रही हिमालय से पुकार है उदधि गरजता बार बार प्राची पश्चिम भू नभ … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: झाँसी की रानी की समाधि पर सुभद्रा कुमारी चौहान इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी | जल कर जि … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: कवि: माखनलाल चतुर्वेदी —————- क्या गाती हो? क्यों रह-रह जाती हो? कोक … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: मैथिलीशरण गुप्त सखि, वे मुझसे कहकर जाते, कह, तो क्या मुझको वे अपनी पथ-बाधा ही पाते? मुझको बहुत उ … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” आया मौसम खिला फ़ारस का गुलाब, बाग पर उसका जमा था रोबोदाब … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: चिंता-सर्ग कामायनी : जयशंकर प्रसाद हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर,बैठ शिला की शीतल छाँह एक पुरुष, भीगे … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: रामधारी सिंह “दिनकर” प्रथम सर्ग वह कौन रोता है वहाँ-इतिहास के अध्याय पर, जिसमें लिखा है, … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: गजानन माधव मुक्तिबोध शहर के उस ओर खँडहर की तरफ़ परित्यक्त सूनी बावड़ी के भीतरी ठण्डे अँधेरे में बसी … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: जयशंकर प्रसाद “कोमल किसलय के अंचल में नन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूली के धूमिल पट में दी … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: जयशंकर प्रसाद कौन हो तुम? संसृति-जलनिधितीर-तरंगों से फेंकी मणि एक, कर रहे निर्जन का चुपचाप प्रभा की … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” रवि हुआ अस्त ज्योति के पत्र पर लिखा अमर रह गया राम-रावण का अ … more →