दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: विरहेऽपि संगमः खलु परस्परं संगतं मनो येषाम् हृदयमपि विघट्ठितं चित्संगी विरहं विशेषयति हिंदी में भावा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: राजा भर्तृहरि कहते हैं कि —————– भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: ———————- भीड़ में पहचान बनाने की कोशिश! बिल्कुल निरर्थक है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी भाषा के कई मशहूर लेखक हुए हैं पर इस भाषा का क्षेत्र बहुत व्यापक है इसलिये कई लेखक कहीं प्रसिद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड द … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १।किसी भी कार्य करने से पहले यह देखना चाहिए की उसका प्रतिफल क्या मिलेगा? यदि प्राप्त लाभ से अधिक परि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाह गयी चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह जिनको कछु न चाहिए। वे साहन के साह कविवर रहीम का कहना है कि इस संस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पाहन को क्या पुजिये, जो नहिं दे जवाब अंधा नर आशा मुखी, यौं ही खोवाई आब संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय बैर, प्रीति, अभ्यास, जस, होत होत ही होय कविवर रहीम कहते हैं की प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब लगि जीवन जगत में, सुख दुख मिलन अगोट रहिमन फूटें गोट ज्यों, परत दुहुन सुर चोट कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तिल समान तो गाय है, बछड़ा नौ- नौ हाथ मटकी भरि भरि दुहि लिया, पुँछ अठारह हाथ संत कबीर कहते हैं कि वाणी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मीन कटि जल धोइये, खाए अधिक पियास रहिमन प्रीति सराहिये , मुयेउ मीत कई आस कविवर रहीम कहते हैं के को म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अपनी मा के पास जाता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसी में … more →