चटनी आमा के (छत्तीसगढ़ी रचना) नंगत ले बइहाये मऊर, ए दे पर बर लटलट ले फर गे। देस के भुंइया ला अमरे बर, आमा के डारा निहरगे।। मंदरस किरवा कस लइकन झूमगे, देख आमा के कयरी। जमदूत कस मुछर्रा रखवार, हावय ननमु… more →
Tularamdewangan's Blogtularamdewangan wrote 9 months ago: चटनी आमा के (छत्तीसगढ़ी रचना) नंगत ले बइहाये मऊर, ए दे पर बर लटलट ले फर गे। देस के भुंइया ला अमरे बर … more →