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विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की पाठक संख्या पचास हजार-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: पाठ पठन/पाठक संख्या पचास हजार पार करने वाला ईपत्रिका इस लेखक का तीसरा ब्लाग/पत्रिका है। इसने हाल ही … more →

Tags: hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, inglish

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, संस्कार, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ————————- हर्त ज्ञार … more →

Tags: चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, editoriyal, Enternment, hindi litreture, hindi writer

संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

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चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →

Tags: अर्थशास्त्र, संस्कार, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

Tags: इंडिया, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Blogger, Blogging, Deepak bapu

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये खुला है आकाश-संपादकीय1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी ब्लाग जगत के कुछ ब्लाग लेखक अंतर्जाल पर वैसी ही गुटबाजी देख रहे हैं जैसी कि सामान्य रूप से बाह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आस्था, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, हिंदी साहित्य, हिन्दी, bharat

मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →

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चाणक्य नीति-दूसरों का आसरा लेने वाले जल्दी तबाह हो जाते हैं 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्। खग चीतफल वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्।। हिंदी मे … more →

Tags: हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, Hindi Darshan, hindi internet, hindi megzine, hindi sanskar

भर्तृहरि नीति शतक: धनी दोस्त से धन और दुर्जन से दया कि याचना न करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हाँ कि —————————— … more →

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संत कबीर वाणी:मिल बाँट कर खाएं वही हैं वीर

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, Kabir, dharm, hindu, India, सन्देश

मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

Tags: hindi Personal, Hindi knowledge, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, web duniya, hindi adhyatm

श्री गुरुवाणी-मन से भक्ति करें तो चिंता से मुक्ति संभव

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: देइ किवाड़ अनिक पड़दे महि, परदारा संग फाकै। चित्रगुप्तु जब लेखा मागहि, तब कउण पड़दा तेरा ढाकै। (सरल गुर … more →

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रहीम दास के दोहे-जो करे काम, वही पाता है सम्मान

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसौ जाय कविवर रहीम कहते हैं कि गंदे स … more →

Tags: Hindu darshan, Hindu culture, India, hindu dharm, web duniya, hindi adhyatm, hindi abhivyakti, hindi sanskar, web dunia

संत कबीर के दोहे-ह्रदय साफ नहीं तो माला फेरने से क्या लाभ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: माला फेरै कह भयो, हिंरदा गाठि न खोय। गुरु चरनन चित राखिये, तो अमरापुर जोय।। माला तो कर में फिरै, ज … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आस्था, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi bhasakar

मनुस्मृतिः हिंसा से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्यद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वग्र्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत्।। … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, अध्यात्म, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दू, Deepak bharatdeep


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