नागपंचमी का दिन था ,नाग-पूजा की तैयारी जोरों से चल रही थी । मैं अपने दोस्तो के साथ बैठा हुआ था, हमलोग एक यज्ञ करने वाले थे । तभी विचार उठा की क्यों नही नाग देवता को ही ढूँढकर लाया जाये ,साक्षात नाग-दे… more →
वाणीPraful wrote 4 months ago: जब इस साल तेरह जनवरी को नौकरी गई थी, उसी समय मुझे लगा था कि मंदी के इस मोड़ पर करियर को नई दिशा दे प … more →
Praful wrote 4 months ago: अजय शर्मासॉफ़्टवेयर इंजीनियर भारत में अक्तूबर-दिसंबर के … more →
alokbanaita wrote 9 months ago: नागपंचमी का दिन था ,नाग-पूजा की तैयारी जोरों से चल रही थी । मैं अपने दोस्तो के साथ बैठा हुआ था, हमलो … more →
alokbanaita wrote 10 months ago: संत जेवियर मुंबई के सालाना जलसे मल्हार की हिंदी प्रतियोगिता में आई.आई.टी. की टीम प्रथम आयी. याद के त … more →
alokbanaita wrote 11 months ago: शायद कुछ छूट गया है; दर्द दिया जो तूने मुझको भूल गया मैं उन सबको पर, दिल से उनका था अपनापन वो अपनापन … more →
alokbanaita wrote 1 year ago: ये अंधेरी रात है पर अनिगनत हैं दीये यहाँ इन दीयों की ज्योित में जगमगाता िदख रहा हूँ आज मैं कुछ िलख र … more →
vikash wrote 1 year ago: बचपन में अपने गाँव में आम की पेड़ों की छाँव में मैं मिटटी पर लोटना चाहता था गिल्ली-डंडा खेलना चाह … more →
vikash wrote 1 year ago: नही मैं सरगम संध्या की ना ही िनशा का साया हूँ , मैं एक सवेरा इस युग का धरती की धुन्धिल काया पर किरणे … more →