ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे, अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र नहीं मानोगे क्या तुम ? तो सुनो तुम मनुष्य निर्वस्त्र ! तुम नग्न हो क्योंकि निर्लज्ज, कह तो दिया, निर्लज्ज हो तुम, मनुष्यों … more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंGrey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 4 months ago: ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे, अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र नहीं मानोगे क्या तुम ? … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: चाहे मुझे पागल करार दिया जाए (a poem by ravi kumar, rawatbhata) कोई यदि पूछेगा सबसे बेहतर रंग कौनसा … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: यह मेरी लिखी एक कविता है, मेरी ही आवाज़ में जिसकी लिंक नीचे दी गई है : Maut Jab Tu Aana Some Rights R … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो… वक़्त के क़तरे बहते रहते … more →
विनय wrote 1 year ago: बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने … more →
विनय wrote 2 years ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →
विनय wrote 2 years ago: यह कौन-सा मुक़ाम है? जहाँ आकर सब चेहरे एक-से हो जाते हैं दिल रेत बनकर सीने में गहरा और गहरा धँसने लगत … more →