झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्या कहूँ मैं तेरे आगे-पीछे दीवाने हज़ार घूमते हैं तेरी लटें उड़ती हैं किस अदा के साथ देखकर आशिक़ अपना नि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 6 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब मैं मतलबी नहीं आशिक़ तुम्हारा हूँ तुम ख़ुदगर्ज़ हो या कोई मासूम पहेली? … more →
विनय wrote 1 year ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे सिर्फ़ तू ही म … more →
विनय wrote 1 year ago: दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मे … more →
विनय wrote 1 year ago: महफ़िले-उश्शाक़ में आशिक़ हम-सा न पाओगे बेकार की बातें हैं सभी दिल को कब तक जलाओगे सहर में शुआ शाम को म … more →
विनय wrote 1 year ago: अगर आँख रोये और दिल सिसकियाँ भरे तो भला बोलो आशिक़ ऐसे में क्या करे इक वो दिन था इक ये आज का दिन है म … more →