कुछ ख्वाब सजा रखे हैं निगाहों के आसपास कुछ गुल खिला रखे हैं निगाहों के आसपास तू मुत्तसिल हो तो ही तो बन पाये आशियां कुछ तिनके जला रखे हैं निगाहों के आसपास ड़रते भी हैं के खोलें ना खोलें इस आँख को कुछ ध… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ ख्वाब सजा रखे हैं निगाहों के आसपास कुछ गुल खिला रखे हैं निगाहों के आसपास तू मुत्तसिल हो तो ही तो … more →