ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टिके जिस पे वो संगेआस्तान हो जाओ अगर निगाह में बस खार नज़र आते हैं खिलाओ गुल और गुलसितान हो जाओ मिली वि… more →
इक शायर अंजाना सा...दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →
kmuskan wrote 1 year ago: आज मेरा चाँद उदास है दुनिया से अनजान अपने ही ख्यालो में उलझा है जानती हूँ उसकी उलझन पर उसे सुलझाना म … more →
kmuskan wrote 1 year ago: नही खुशियों की कतार मंजूर ,नही रौशनी की सोगात मंजूर क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है नही गमो क … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है इधर उधर नजरे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टि … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो दिल की सदा साँसों के सिलसिले कहते हैं तुम मेरे हो तुम मेरे हो यह … more →