ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टिके जिस पे वो संगेआस्तान हो जाओ अगर निगाह में बस खार नज़र आते हैं खिलाओ गुल और गुलसितान हो जाओ मिली वि… more →
इक शायर अंजाना सा...wrote 3 months ago: आसमान फिर सिमट रहा है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) आसमान जब भी उतरता है धरा पर उसके पास होते ह … more →
wrote 4 months ago: चलते थे जिस ज़मीं पर, संभल संभल कर हम, सरकी वही ज़मी नये कदम उठाने के पहले, आसमान से तो पानी बरसता … more →
wrote 5 months ago: छोटे छोटे सपने थे, पास मेरे सब अपने थे, न थी चाह, आसमान मे उड़ाने की, धरती ही मेरी अपनी थी, बड़ा सोच … more →
wrote 11 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →
wrote 1 year ago: आज मेरा चाँद उदास है दुनिया से अनजान अपने ही ख्यालो में उलझा है जानती हूँ उसकी उलझन पर उसे सुलझाना म … more →
wrote 1 year ago: नही खुशियों की कतार मंजूर ,नही रौशनी की सोगात मंजूर क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है नही गमो क … more →
wrote 1 year ago: ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है इधर उधर नजरे … more →
wrote 1 year ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टि … more →
wrote 1 year ago: तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो दिल की सदा साँसों के सिलसिले कहते हैं तुम मेरे हो तुम मेरे हो यह … more →