Blogs about: आसाँ
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तुम मेरे हो
तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो कितनी हों दूरियाँ, कितने हों फ़ासले तुम मेरे हो, तु… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
तुम मेरे हो
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो कितनी हों द … more »
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले कभी ते … more »
नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही वह जो है मा … more »
