Blogs about: आस्था

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हिंदी ब्लाग लेखन के लिये खुला है आकाश-संपादकीय1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी ब्लाग जगत के कुछ ब्लाग लेखक अंतर्जाल पर वैसी ही गुटबाजी देख रहे हैं जैसी कि सामान्य रूप से बाह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, हिंदी साहित्य, हिन्दी, bharat, Deepak bharatdeep

संत कबीर के दोहे-ह्रदय साफ नहीं तो माला फेरने से क्या लाभ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: माला फेरै कह भयो, हिंरदा गाठि न खोय। गुरु चरनन चित राखिये, तो अमरापुर जोय।। माला तो कर में फिरै, ज … more →

Tags: hindi journlism, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar, hindu dharm, hindu life

चाणक्य नीतिः धर्म परिवर्तन बनता है तनाव का कारण (chankya niti)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः।। नीति विशारद चाणक्य कहते ह … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindu dharm, web duniya, Hindi vews

चाणक्य नीतिः अपने धर्म और भक्ति में बदलाव बनता है तनाव का कारण

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →

Tags: Hindi writing, Hindi Darshan, hindi megzine, chankya, hindi shabd, web dunia, shri Gita, hindi internet, Hindi Blogging

चाणक्य नीतिः अपने धर्म और भक्ति में बदलाव बनता है तनाव का कारण

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →

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‘विहिप’ का ‘फरमान’: प्रत्येक परिवार चार बच्चे6 comments

योगेन्द्र wrote 8 months ago: विगत इक्कीस अक्टूबर के दैनिक वार्तापत्र ‘हिन्दुस्तान’ के मुखपृष्ठ पर एक समाचार देखने को मिला, शीर्षक … more →

Tags: जनसंख्या, देश, धर्म, भारत, राष्ट्र, समाज, अल्पसंख्यक, धर्मप्रचारक, धार्मिक संगठन

रहीम के दोहेःसहृदय लोगों को बुरी संगति नहीं फलती

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: रहिमन उजली प्रकृति को, नहीं नीच को संग करिया वासन कर गहे, कालिख लागत अंग कविवर रहीम कहते हैं कि जिनक … more →

Tags: abhivyakti, दीपक भारतदीप, साहित्य, Deepak bharatdeep, editoriyal, Friends, Internet, web bhaskar, web dunia

चाणक्य नीतिः कौन ऐसा व्यक्ति है जिसके कुल में दोष नहीं है1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: 1.आज के युग में अर्थ की प्रधानता है और धन संचय प्रमुख आधार है। धन संचय हर मनुष्य के लिये आवश्यक है … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी

चमत्कार को नमस्कार, सहजता से कोई नहीं सरोकार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →

Tags: Blogroll, writing, vyangya, aastha, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, चिन्तन

आम पाठक की प्रतिक्रिया की बन सकती है अंतर्जाल लेखकों की प्रेरणा-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: इस सप्ताह मैंने कोई ऐसा पाठ या रचना नहीं लिखी जिसकी चर्चा की जा सके। वजह यह रही कि बरसात के मौसम में … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, कथा साहित्य, कविता, काव्य, चिन्तन, दर्शन

धार्मिक स्थल और हमारी आस्था

अजीत कुमार मिश्रा wrote 1 year ago: महोदय, मुझे भी कई बार कलकत्ता जाने का सौभाग्य प्राप्त हुया और हर बार मैं कालीघाट मंदिर में भी गया पर … more →

Tags: Uncategorized

मनुस्मृति:बिना मांगे मिल जाये उसे अमृत समझें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इन्द्रियों के विषयों-रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श-में विद्वानों को कभी आसक्त नहीं होना चाहिए. विषय … more →

Tags: Blogroll, writing, Global Dashboard, Thought, संस्कार, inglish, संपादकीय, आध्यात्म, चिन्तन

रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि दूध कलारी कर गाहे, मद समुझै सब ताहि कविवर रहीम का कथन है कि नीच … more →

Tags: अध्यात्म, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, deshboard

रहीम के दोहे:हृदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि कूपहु ते कहुं होत है, मन काहु को बाढि कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: Blogroll, web duniya, web dunia, Deepak bharatdeep, hindu dharm, hindu life, Hindu culture, साहित्य, हिन्दी

संत कबीर वाणी:पढ़ कर पत्थर और लिख कर ईंट होते लोग

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →

Tags: Blogroll, dharam, aastha, inglish, आध्यात्म, चिन्तन, साहित्य, हिंदी साहित्य, Internet

मनु स्मृति: दंड का उचित उपयोग न करने वाला अपयश का भागी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है जिन्हें दंड नहीं देना चाहिए तथा जिनको देना चाहिऐ उनको नहीं द … more →

Tags: आलेख, विचार, हिंदी, चिन्तन, bharat, web dunia, web bhaskar, web navabharat, साहित्य

रहीम के दोहे:सच्चा मित्र दही की तरह निभाता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मथत मथत माखन रही, दही मही बिलगाव रहिमन सोई मीत हैं, भीर परे ठहराय कविवर रहीम कहते हैं कि जब दही को ल … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, आलेख, कला, ज्ञान, रहीम, संस्कार, समाज, हिन्दी

चाणक्य नीति:जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता वहाँ समृद्धि आती है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता, अन्न संचित रहता है तथा पति-पत्नी में झगडा नहीं होता वहाँ … more →

Tags: Blogroll, hindi kavita, Hindi friends, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia

चाणक्य नीति:जहाँ धनी, ज्ञानी और निपुण राजा न हो वह स्थान छोड़ दें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.किसी भी व्यक्ति का जहाँ सम्मान न हो उसे त्याग देना चाहिए. क्योंकि बिना सम्मान के मनुष्य जीवन जीने … more →

Tags: arthshastra, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, आलेख, चाणक्य नीति, ज्ञान, संस्कार, साहित्य, हिन्दी


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