मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते … more →
विनय wrote 6 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more →
Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, बाज़ार, शाम
mehhekk wrote 9 months ago: रुके थे कभी ज़िंदगी की राहो पर राह द … more →
Tags: Kavita, Hindi Poem, Mehek, mehhekk, Blogroll, TUM, MiLan
विनय wrote 9 months ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर … more →
Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, दर्द, Love, eyes, प्यार, मोहब्बत, Pain, साँस
Follow this tag via RSS