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Blogs about: आह्वान

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चुनाव, राजनीतिक दल और बुद्धिजीवी

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: हमने लिखा था कि वर्तमान संसदीय प्रणाली द्वारा मजदूर वर्ग कभी सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता. लेकिन इसका … more →

Tags: एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, पूंजीवादी संकट, बुर्जुआ लोकतंत्र, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा, Communist

गोरखपुर और गुडगाँव के मजदूरों का दमन और बुद्धिजीवी वर्ग की चुप्पी 4 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक तरफ तो उत्तर प्रदेश की सरकार ‘सर्वजन हिताय’ होने का दावा करती है लेकिन दूसरी और इस सर … more →

Tags: आंदोलन, आतंकवाद, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, क्रांति, दायित्वबोध, पूंजीवादी संकट, ललकार, संघर्ष

अच्छे कारण के लिए खदेड़ा गया-बर्टोल्ट ब्रेष्ट

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: खाते पीते घर के बच्चों की तरह मेरा लालन पालन हुआ मेरे माँ-बाप ने मेरे गले में एक कालर बाँधा और खूब ट … more →

Tags: ललकार, नव सर्वहारा प्रबोधन, कविता, बर्टोल्ट ब्रेष्ट

भगत सिंह, कम्युनिस्ट और गाँधी होने का मतलब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: पूंजीपतियों के चाटुकार बुद्धिजीवियों द्वारा जानबूझकर परंतु कुछ पढ़े-लिखे लोगों द्वारा अनजाने में भावु … more →

Tags: भगत सिंह, आंदोलन, कम्युनिस्ट, फासिज्म, युद्ध, कविता, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना, इन्कलाब

आज शहीदे-आजम का 102वां जन्मदिन है 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम ! भगत सिंह की बात सुनों, नई क्रांति की राह चलो ! मेहनतकश ब … more →

Tags: भगत सिंह, क्रांति, साम्राज्यवाद, युद्ध, काले कानून, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना, इन्कलाब, आज़ादी

चुनाव या अन्य इंकलाबी विकल्प – क्या करें

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: इस आलेख की पिछली कड़ियों के लिए : 3 इससे पहली कड़ी के लिए : यहाँ देखें 2 दूसरी किश्त : यहाँ देखें 1. ऑ … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना, इन्कलाब, भारतीय चुनाव प्रणाल, लोक स्वराज्य, राज्यों के विधानसभा

भारत के गाँव-गाँव तक पैठ कर चुकी बुर्जुआजी

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: पिछली कड़ी के लिए यहाँ देखें इस लेख के सम्पूर्ण ऑडियो (पंजाबी) के लिए यहाँ दबायें चुनाव या अन्य इंकला … more →

Tags: मार्क्सवाद, Maoism, सोवियतें, कम्यून, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना, इन्कलाब, संशोधनवाद, भारतीय चुनाव प्रणाल

First Arvind Memorial Seminar1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: “Labour Laws and New Forms of Working Class Resistance in the Era of Globalisation” 25 J … more →

Tags: प्रतिबद्ध, पूंजीवादी संकट, उदारीकरण, LABOUR LAWS, New Forms of Working Class Resistance, Globalisation

प्रथम अरविन्द स्मृति संगोष्ठी कार्यक्रम

saathisukhdev wrote 4 months ago: (24 जुलाई, 2009) विषय भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध  के नये रूप भूमण् … more →

Tags: आंदोलन, उदारीकरण, काले कानून, दायित्वबोध, पूंजीवादी संकट, संघर्ष, साम्राज्यवाद, Marxism, अरविन्द स्मृति संगो

कांग्रेस की जीत…अफलातून और सुरेश चिपलूनकर… कुछ विशेष टिप्पणियों का सामान्य जवाब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखे : “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते म … more →

Tags: दायित्वबोध, प्रतिबद्ध, लेनिन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट

"कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर …की टिप्पणियों के प्रत्युत्तर में5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: इस पोस्ट से सम्बंधित प्राप्त टिप्पणियों के पश्चात् यह ज़रूरी हो गया है कि इस विषय पर वाद-विवाद जारी … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, दायित्वबोध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, प्रतिबद्ध, लेनिन, विरासत, सर्वहारा

कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर ... 14 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: जिस देश का प्रधानमंत्री स्वयं स्वीकार करे की देश की 7० प्रतिशत जनता 20 या 20 रूपए से कम पर गुज़ारा कर … more →

Tags: भगत सिंह, लेनिन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, मार्क्सवाद, फासिज्म, आतंकवाद, काले कानून, कार्ल मार्क्स

मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन जब मज़दूरों के बहते ख़ून से जन्मा लाल झण्डा मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ … more →

Tags: कम्युनिस्ट, बिगुल, मजदूर, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, संघर्ष, सर्वहारा, पूँजीपति वर्ग के वफा, मई दिवस

मई दिवस पर याद किया मज़दूरों की शहादत को

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: बिगुल संवाददाता गोरखपुर नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता और अखिल भारत नेपाली एकता मंच ने मिलकर अन् … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, मजदूर, सर्वहारा, इन्कलाब, मई दिवस, मजदूरों के हक़

पाँच क्रान्तिकारी जनसंगठनों का साझा चुनावी भण्डाफोड़ अभियान

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: चुनावी राजनीति के मायाजाल से बाहर आओ! नये मज़दूर इन्कलाब की अलख जगाओ!! देशभर में लोकसभा चुनाव के लिए … more →

Tags: बिगुल, क्रांति, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, फासिज्म, साम्राज्यवाद, काले कानून

चुनावी नौटंकी का पटाक्षेप: अब सत्ता की कुत्ताघसीटी शुरू

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: जनता को सिर्फ यह तय करना है कि वह इसे कितना और बर्दाश्त करेगी! बिगुल डेस्क करीब डेढ़ महीने तक चली देश … more →

Tags: कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, शोषण-उत्पीड़न, चुनाव

कुछ ज्यादा ही लाल... कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: (बिगुल के स्वरूप पर आत्माराम का पत्र) (जुलाई-अगस्त 1996) कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन्त … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, लेनिन

एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: विशेष सम्पादकीय (बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995) आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेह … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन सम्बन्ध, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, बिगुल

जनता की मुक्ति का रास्ता 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: इलेक्शन नहीं ! इन्कलाब ! मेहनतकश भाइयो और बहनों! नौजवान साथियों! 15वीं लोकसभा का चुनाव चल रहा है! एक … more →

Tags: क्रांति, ललकार, समाजवाद, सर्वहारा, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण, Delhi-where live 40 lacs of peaple in jhuggi jhompadi, पूँजीपति वर्ग के वफा


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