wrote 1 year ago: तेरे रेशमी बदन से सरकता है यह दुप्पटा हज़ारों आहें लहू में डूबकर आग बन जाती हैं ज़ालिम तेरे तआक़ुब की य … more →
wrote 2 years ago: अगर आँख रोये और दिल सिसकियाँ भरे तो भला बोलो आशिक़ ऐसे में क्या करे इक वो दिन था इक ये आज का दिन है म … more →
wrote 2 years ago: रूह बहुत बेक़रार’ बहुत बेकल है इस जिस्म से छुटकारा चाहती है अगर तुम न मिली मुझको… यह बेक़र … more →