मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शेर-ओ-सुख़न तू ही है गीत-ओ-रुबाई-ओ-क़ता हम्द-ए-ज़हन तू ही है शेर का अशआर तू मफ़हूम-ए-नज़्म तू ही महफ़िल तू ह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मिले थे इत्तेफ़ाक़न हम ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा ज़र … more →