वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मि… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 6 months ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है ब … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों … more →