मैं तुम्हें चाहता हूँ यह इक़रार कर पाना बहुत मुश्किल है आकर तुम्हीं मुझसे इज़हारे-इश्क़ का कोई वादा ले लो, वरना ज़िन्दगी का एक-एक दिन तेरे इंतिज़ार में कटेगा इक़रार: to confess | इज़हार: to express शायिर: व… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: मैं तुम्हें चाहता हूँ यह इक़रार कर पाना बहुत मुश्किल है आकर तुम्हीं मुझसे इज़हारे-इश्क़ का कोई वादा ले … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता ह … more →
विनय wrote 1 year ago: दर्द सुलगते क्यों हैं जलते क्यों नहीं मेरी आँखों में अब्र हैं बरसते क्यों नहीं यह तुमको देखकर ही शाय … more →
विनय wrote 1 year ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में … more →
विनय wrote 1 year ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्ह … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैस … more →
विनय wrote 1 year ago: इक बार आ जा तू, इक बार आ जा तू इन सुरमई अखियों में बस जा तू यह राहें निहार-निहार के थक गया हूँ इक बा … more →