वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या होता है तेरे इंतज़ार में परवान इश्क़ में जितना चढ़ता हूँ सीढ़ियाँ हिज्र में उतनी उतरता हूँ सचो-वहम का… more →
तख़लीक़-ए-नज़रkmuskan wrote 6 months ago: वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह कहते है वक्त से पहले किसी को … more →
kmuskan wrote 10 months ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है जानती हूँ ,तू शामिल नही … more →
विनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →
विनय wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →
विनय wrote 1 year ago: इक लड़की है मुझसे वह अक्सर मिला करती है खिलती कलियों-सी मुस्कुराती है परी लगती है कहती है वह, एक लड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: यह रंगीन फ़िज़ा बेरंग दिख रही है सावन की बदली तंग दिख रही है एक मैं सिर्फ़ मैं यहाँ बैठा रहता हूँ बैठकर … more →
विनय wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →