वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रkmuskan wrote 1 month ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है … more →
विनय wrote 6 months ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइ … more →
विनय wrote 7 months ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर … more →
विनय wrote 8 months ago: इक लड़की है मुझसे वह अक्सर मिला करती ह … more →
विनय wrote 8 months ago: यह रंगीन फ़िज़ा बेरंग दिख रही है सावन की … more →
विनय wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे … more →