कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारती नही है……….जब वो निर्दोषों का लहू बहाते है क्यों उनकी आत्मा उनसे ये नही पूछती कि… more →
कुछ िदल सेरवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 weeks ago: असली इंसान की तरह जिएंगे – मार्क्स ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →
kmuskan wrote 1 year ago: कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारत … more →
विनय wrote 1 year ago: जो होता है भले के लिए होता है ख़ुद को समझने के लिए होता है इंसान की आदत है बदल जाना कि वह बदलने के ल … more →