चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है तारा तोड़ कर जमीन पर सजाया जाता है बेचने वाला सौदागर होना चाहिए ख्वाब और भ्रम बेचना यहां आसान है अपढ़… more →
** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrikaदीपक भारतदीप wrote 10 months ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है त … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बडे-बुजुर्ग कह गये हैं की जितनी सुविधा लोगे उतनी ही जीवन में कठिनाई तुम्हारे सामने आयेगी। जैसे … more →