Blogs about: इन्तिज़ार
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 6 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मु … more »
वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा जिस दिन … more »
आँखों से सुना आँखों ने कहा
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: आँखों से सुना आँखों ने कहा आँखों ने सु … more »
तेरी चुप निगाहें
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें तेरे … more »
मेरी राह के मुसाफ़िर
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है ज … more »
यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: यार तू ज़िन्दगी, यार मैं ज़िन्दगी यार तू … more »
राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी तुम मिलती नह … more »
जैसे ज़िन्दगी वीरान है
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: जैसे ज़िन्दगी वीरान है जैसे ज़िन्दगी बे … more »
वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है हमको … more »
मैं कम-शक़्ल हूँ
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: जिसे चाहता हूँ वो कहता है मुझसे प्यार … more »
उल्टे सूरज की आग जम गयी
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: सोचा था दिन चढ़ेगा दोपहर तक तो सूरज की … more »
