इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना खुशी है ज़िंदगी जीने की सज़ा आज दोस्तों जो लब्ज़ उसके वास्ते निकले थे एक दिन वो लब्ज़ बन गये हैं दुआ आज … more →
इक शायर अंजाना सा...रविकुल wrote 5 months ago: भ्रष्ट समाज का उत्कर्ष करो ! जीवन है संघर्ष संघर्ष करो !! मिटा डालो उग्रता के निशां, बदल डालो भ्रमित … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →