काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जहान है, ये फ़ितरत-ए-इन्सान है पेड़ पर लगते ही फल धर लेते हैं पत्थर कई तू ड़रा सा क्यों खड़ा है देख तेरे आ… more →
इक शायर अंजाना सा...ktheleo wrote 5 months ago: मै अपने आप से कभी घबराता नहीं, पर खाम्खां सरे आईना यूंहीं जाता नहीं. चापलूसी,बेईमानी,और दगा, ऐसा कोई … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 10 months ago: जिंदगी कई बार हमें अंधेरे में लाके छोड़ देती है | दर्द में बेहाल बेबस छोड़ देती है ना मैं नज़र आता हूँ … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 10 months ago: जिंदगी कई बार हमें अंधेरे में लाके छोड़ देती है | दर्द में बेहाल बेबस छोड़ देती है ना मैं नज़र आता हूँ … more →
विनय wrote 12 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर सुबह टूट ज … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जह … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसाफिर ये मेला छूटेगा जब होगा धमाका मौत छीन लेगी खाली हाथ जाते … more →