सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती, सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती। इबादत नहीं है सिर्फ मस्ज़िद में जाकर सर झुकाना, एक और इबादत है परोपकार के काम में मन लगाना। गुरुद्वारे में मत्था टेकने … more →
पसंदविनय wrote 1 year ago: काश वह कोई गुल होती मैं उसे अपने लबों से चूम लेता गर वह कोई आइना होती मैं ख़ुद को उसमें उतार देता इश … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती, सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती। इबादत नहीं है सिर् … more →