विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →
विनय wrote 1 year ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →