तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर सुबह टूट जायेगा मैं भी जानता हूँ रोज़ दरगाह जाके दुआ करते हो क्या माँगते हो मैं भी जानता हूँ उम्र गुज़र नहीं सकत… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर सुबह टूट ज … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुदा ने जब किसी को न कहा अपना ख़ुदा फिर तूने क्यों कहा ग़ैर को अपना ख़ुदा यह तो हद ही कर दी तूने, य … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: चलो आदमी को आदमी से मिलवाया जाए, हो सके तो उसका चेहरा ही उसे दिखाया जाए। पहचानना भूल गया है ख़ुद को आ … more →