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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
— 3 comments
विनय प्रजापति wrote 5 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
कोई आता है ज़िन्दगी में
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़् … more »
