मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं हो ना बारिश ये नज़रें झुका लो ग़म मुझको देकर वो मुस्का के बोले तुम्हारी अमानत है तुम ही संभालो वो नीच… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →