तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर को मैं झांका करता हूं चोरी-चोरी, चूपके-चूपके । मेरे होठों पर कई दिनों से तितली बैठने नहीं आयी । मेर… more →
विजयकुमार दवे / Vijaykumar DaveKrishna Kumar Mishra wrote 2 months ago: असान अथवा अवसान बीवी और हिन्दू समाज की महिलायें ! मेरे गांव की महिलायें एक पूजा बडी़ आस्था के साथ कर … more →
vijaykumardave wrote 2 years ago: तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर … more →