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Blogs about: उत्पादन के संबंध

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बीबीसी द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के अनुसार मुक्त बाजार पूंजीवाद त्रुटिपूर्ण2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: बर्लिन दीवार के गिरने के 21  साल बाद, बीबीसी (देखें BBC News) के  नए सर्वेक्षण  ने मुक्त बाजार पूंजी … more →

Tags: उदारीकरण, पूंजीवाद, पूंजीवादी संकट, सर्वेक्षण, बर्लिन दीवार का गिरन, मुक्त बाजार पूंजीवा, सोवियत यूनियन का ध्व

लक्ष्मी-पूजन करें लेकिन 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: जब भी हम बाजार से कोई वस्तु खरीदते हैं तो हम उसके भौतिक गुणों की ओर ही देखते हैं. हो सकता है हम उसके … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, दायित्वबोध, विचारणीय : मीडिया से, पण्यों की जड़ पूजा, श्रम का मूल्य, श्रम-शक्ति

अक्टूबर क्रान्ति की मशाल बुझी नहीं है! बुझ नहीं सकती! 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: अक्टूबर क्रांति की ९२वीँ वर्षगांठ पर अब से ठीक 79 वर्ष पहले, 1917 में (पुराने कैलेण्डर के अनुसार अक् … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, क्रांति, पूंजीवादी संकट, फासिज्म, लेनिन, अक्टूबर क्रान्ति, इन्कलाब, दुस्साहसवाद, बोल्शेविक

भोजन दी खोज द्वारा सभ्यता दे निर्माण (दूसरी प्रकृति दे निर्माण ) दा द्वंदात्मक भौतिकवादी इतिहास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: फाइल डाउनलोडिंग लिंक फाइल साइज़ 6000 k समय 51 मिनट इस ऑडियो के हिंदी टेक्स्ट के लिए यहाँ देखें : . … more →

Tags: दायित्वबोध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, वर्ग चेतना, समाज और संस्कृति

हम अब भी लालगढ़ में हैं - चत्रधर महतो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: हम अब भी लालगढ़ में हैं, ऐसा कहना है लालगढ़ (पश्चिम बंगाल) के आदिवासी नेताओं का. मंगलवार, 30 जून को … more →

Tags: आंदोलन, पूंजीवादी संकट, आतंकवाद, उदारीकरण, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना, संशोधनवाद, समाज और संस्कृति, दुस्साहसवाद

पूंजीवादी संचय मेहनतकश वर्ग के दरिद्रीकरण और अध:पतन की ओर -- सम्पत्तिहर्त्ताओं के सम्पत्तिहरण की ओर ले जाता है

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 31.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां उस स्थिति में भी जब मजदूर … more →

Tags: सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, कार्ल मार्क्स, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना, डेविड रियाज़ानोव, व्याख्यात्मक टिप्पण

सर्वहारा आन्दोलन के अंतरराष्ट्रीय चरित्र का विकास और क्रांति 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 30.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “वर्ग विरोध पर आधार … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, संघर्ष, युद्ध, उत्पादक शक्तियां, कार्ल मार्क्स, Karl Marx

जब औजार क्रांति की माँग करते हैं 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के आलेख  उद्यम और श्रम की इन टिप्पणियों को  देखें ; अभिषेक ओझा said… … more →

Tags: क्रांति, आंदोलन, समाजवाद, पूंजीवादी संकट, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, उदारीकरण, पूँजी, मजदूर

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर्नेस … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, कम्युनिस्ट, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा, अधिशेष, कार्ल मार्क्स, पुस्तकों सबंधी जानक

श्रम और पूंजी की टक्कर - एक ऐसा 'वैषम्य' जिसका निपटारा बल प्रयोग द्वारा ही होता है 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: श्री दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा लिखित आलेख ‘उद्यम भी श्रम ही है‘ और श्री ज्ञानदत्त जी प … more →

Tags: पुस्तकें, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, संघर्ष, युद्ध, उत्पादक शक्तियां, Marxism, कार्ल मार्क्स

अंतर्जाल, मार्क्सवाद और बौद्धिक वेश्यागमनी5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: मार्क्सवाद के विकास के लिए ज़रूरी है कि मार्क्सवाद को विकसित करने में मार्क्सवादियों के अब तक के अवद … more →

Tags: प्रतिबद्ध, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, कार्ल मार्क्स, वर्ग चेतना

इस युग का प्रधान वैषम्य : जनतन्तर कथा (34) की हिफाजित में 10 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →

Tags: विचारणीय : मीडिया से, प्रतिबद्ध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, वैकल्पिक मीडिया

मई दिवस का इतिहास-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट का पहला भाग ….यहाँ देखें शिकागो की हड़ताल और हे मार्केट की घटना पहली मई को शिकागो में … more →

Tags: लेनिन, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, फासिज्म, युद्ध

मई दिवस का इतिहास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: अलेक्जेण्डर ट्रैक्टनबर्ग अनुवाद : अभिनव सिन्हा मई दिवस का जन्म काम के घण्टे कम करने के आन्दोलन से अट … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, युद्ध, विरासत, उत्पादक शक्तियां

पूंजीवाद के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के प्रतिरोध के विभिन्न रूप

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 23.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां पूंजीवादी समाज मेहनतकशों … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स

मजदूर पूंजीपति को उधार देता है1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 21.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “ऐसे प्रत्येक देश म … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक

श्रम और श्रमशक्ति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 18. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां यहाँ पर मार्क्स और एंगेल्स … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, बाल श्रम, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक

मैन्युफैक्चर और बड़े पैमाने के उत्पादन (मशीनोफैक्चर) की कालावधियों में श्रम विभाजन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 17. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां दस्तकार किसी वस्तु के एक क … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पुस्तकें, मार्क्सवाद, विरासत, कम्युनिस्ट पार्टी क

सर्वहारा वर्ग का ऐतिहासिक विकास 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 16. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां वर्तमान समय में ‘सर् … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स


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