उदयप्रकाश की कविता राजधानी में बैल ॥१॥ बादलों को सींग पर उठाए खड़ा है आकाश की पुलक के नीचे एक बूंद के अचानक गिरने से देर तक सिहरती रहती है उसकी त्वचा देखता हुआ उसे भीगता हूं मैं देर तक । … more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 2 years ago: उदयप्रकाश की कविता राजधानी में बैल – ६ आई.टी.ओ. पुल के पास दिल्ली के सबसे व्यस्त चौराह … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: उदयप्रकाश की कविता राजधानी में बैल – ५ अपनी दोनों हथेलियों के बीचोंबीच भर लो उसके कंधे क … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: उदयप्रकाश की कविता राजधानी में बैल – ४ पेसिफ़िक मॉल के ठीक सामने सड़क के बीचोंबीच खड़ा है द … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: उदयप्रकाश की कविता राजधानी में बैल – ३ सूर्य सबसे पहले बैल के सींग पर उतरा फिर टिका कुछ दे … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: उदयप्रकाश की कविता राजधानी में बैल ॥१॥ बादलों को सींग पर उठाए खड़ा है आकाश की पुलक के नीचे … more →