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Blogs about: उदास

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आज फिर मन उदास है, 1 comment

Nidhi KM wrote 6 months ago: आज फिर मन उदास है, कोई अपना नही पास है…               चल रही हूँ जिन रहो मे,               कभी … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, अपना, आँधियारों, आज, आदत, आस, कभी, काँटे

कुछ लकीरे 8 comments

kmuskan wrote 11 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →

Tags: Zindagi, अक्स, अजनबी, आंसू, आग, ज़िन्दगी, तस्वीर, पीड़ा, फ़रिश्ते

यही तो ज़िन्दगी है 3 comments

kmuskan wrote 1 year ago: इक सपना टूटा आँख से आंसू बहा कुछ देर तक दिल बेचैन रहा उदास रहा पर फिर जैसे ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया … more →

Tags: Zindagi, आँख, आंसू, ज़िन्दगी, दिल, सपना, सुंदर, Blogroll, hindi

उदास चाँद 1 comment

kmuskan wrote 1 year ago: आज मेरा चाँद उदास है दुनिया से अनजान अपने ही ख्यालो में उलझा है जानती हूँ उसकी उलझन पर उसे सुलझाना म … more →

Tags: Kavita, muskan, Zindagi, hindi, Poetry, kala, Blogroll, आसमान, चाँद

हँसते है ज़माने मैं और भी कई...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हँसते है ज़माने मैं और भी कई, दिल से हँसते पहली बार देखा है, आज मैंने उनको हँसते हुए देखा है, उनकी ह … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, amarjeet singh, अमर, अमरजीत, खूबसूरत, गुलशन, दिल

अंधेरे मे छुप गया चाँद मेरा...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अंधेरे मे छुप गया चाँद मेरा, हुआ उदास न जाने क्यों दिल मेरा, जानता हूँ न तू मेरी और न मैं तेरा, दीदा … more →

Tags: अमरजीत सिंह, दिल, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, चाँद, दीदार-ऐ-यार

आज है वो कुछ उदास उदास से...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आज है वो कुछ उदास उदास से न जाने क्यों नही दे देते ये उदासी मुझे वो आज है वो कुछ रूठे रूठे से न जाने … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, आज, रूठे, उदासी

आज काली रात है तो क्या...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आज काली रात है तो क्या, कल चाँदनी रात होगी, आज तपती धुप है तो क्या, कल मौसम-ऐ-बहार होगी, आज खाली हाथ … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, काली रात, चाँदनी, रात

कुछ तो बोलो!

विनय wrote 1 year ago: क्यों लोग यहाँ जमा हैं? क्यों वह उदास बैठा है? कुछ तो बोलो! मेरी साँसें उखड़ रही हैं शायिर: विनय प्र … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, लोग, साँस, Sad, Breath, People

दोनों बहुत देर तक बैठे रहते हैं

विनय wrote 2 years ago: बहुत उदास-सी एक शाम बैठी है मेरे साथ अपने ख़ामोश लबों से कह देती है अनकही बातें दोनों बहुत देर तक बै … more →

Tags: मेरी नज़्म, चाँद, इश्क़, Love, Reminisce, प्यार, मोहब्बत, शाम, ख़ामोश


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