शीतल जल में चंदन घुला हो ऐसी थी काया काले-काले बादलों से घनी थी ज़ुल्फ़ों की छाया क्यों जचने लगी यह बेख़ुदी कैसी है माया माया यह तेरी कैसी माया है हर तरफ़ तेरा जादू छाया है जाने कैसा मौसम आया है दिल ने ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: शीतल जल में चंदन घुला हो ऐसी थी काया काले-काले बादलों से घनी थी ज़ुल्फ़ों की छाया क्यों जचने लगी यह बे … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आग फिर न बुझी यह दिल की लगी है दिल से लगी है जब यह लगी है फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: रहते हैं हम जिन ख़ाबों में उन ख़ाबों का एहसास तुम हो रह जायें जो साँसें तन में बाक़ी उन साँसों की ख़ा … more →