आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म से मै ड़रता नहीं जैसी भी रही ज़िंदगी मुँह कभी मोड़ा नहीं रात कि महफ़िल सजी थी, चाँद का गिलास था ग़म पिये त… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →