Blogs about: उपन्यास

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गाँव के आवारा कुत्ते भी ठण्ड से बचने के लिए कही जा छुपे थे |

विजय-राज चौहान wrote 4 months ago: *************** पूस महीने की कड़के की ठण्ड पड़ रही थी | गेहूँ जमकर काफी बड़े हो गए थे, उनमें अब कोर ल … more →

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नन्हा बालक माँ -बाप की वास्तविक ममता से वंचित था |

विजय-राज चौहान wrote 4 months ago: ************* अलार्म घड़ी की आवाज आई तो रूबिया ने अल साई आँखों से उसका स्विच ऑफ कर दिया | उसने देखा … more →

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एक साथ आठ बच्चों की मां की सुनो कहानी!

Praful wrote 5 months ago: दुनिया में अभी तक सबसे अधिक समय तक जिंदा रहने वाले आठ बच्चों की मां को अपने इस अनोखे अनुभव को बांटने … more →

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तुम कुत्ते के मुँह की इस हड्डी को इसके मुँह में भी देना चाहते हो |

विजय-राज चौहान wrote 6 months ago: लगभग पाँच साल बीत जाते है | समय की मरहम और पारो,हरिया के प्यार ने दीनू के जख्मो को भर दिया था | बालक … more →

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दीनू ने अन्न का एक भी दाना मुँह में नही डाला था |

विजय-राज चौहान wrote 6 months ago: दो दिन हो गए थे लेकिन दीनू ने अन्न का एक भी दाना मुँह में नही डाला था, वह अन्दर कोठे में पड़ा फुलवा क … more →

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दीनू कापते हाथों से चिता में अग्नि प्रवाहित करता है |

विजय-राज चौहान wrote 7 months ago: रात के लगभग बारह बज चुके थे | बैलगाड़ी गाँव की तरफ चल रही थी ,हरिया , दीनू ओर पारो चुपचाप बैठे थे । … more →

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उसने अपनी आँखों के सामने दो खून होते हुए देखे थे |

विजय-राज चौहान wrote 7 months ago: दीनू का घुटना दीवार से टकरा जाता है और उससे खून बहने लगता है | दीनू जमीन पर हाथ रखकर खड़ा होता है | … more →

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अभिव्यक्त

प्रदीप wrote 7 months ago: अभिव्यक्त पर आपका स्वागत करते हुए हर्ष और उत्साह का अनुभव हो रहा हे| आप हम तक पहुंचे या हम आप तक दोन … more →

Tags: अभिव्यक्त, आलोचना, कविता, विचार, व्यक्तित्व विकास, साहित्य, हर्ष और उत्साह, हिन्दी भाषा

भगवान के लिए मेरी पत्नी को बचा लीजिये डॉक्टर.......|

विजय-राज चौहान wrote 7 months ago: अन्दर हाल की चकाचौंध और जलते-बुझते बल्बों को देखकर दीनू की आँखें चुंधिया जाती है | वह वाही खड़ा हो ज … more →

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दीनू गार्ड के पाँव पकड़ लेता है, उसकी आंखें भर आई थी |

विजय-राज चौहान wrote 8 months ago: दीनू बैलगाड़ी को खड़ी करके डॉक्टर साहब के मकान की तरफ़ दौड़ता है | वह दरवाजे को जोर-जोर से खटखटाता है … more →

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इंडिया, भारत एवं अडिगा का ह्वाइट टाइगर3 comments

योगेन्द्र wrote 8 months ago: ‘द गार्जियन’ की समीक्षा-पृष्ठ का एक अंश मुझे इस स्थल पर अपने इस मत कि इंडिया भारत नहीं है और दोनों म … more →

Tags: इंडिया, देश, भारत, समीक्षा, India, अन्याय, अरविंद अडिगा, द गार्जियन, द टेलीग्राफ

फुलवा दर्द के मारे जोर-जोर से चिल्ला रही थी,उसकी चीखे आसमान छू रही थी | 1 comment

विजय-राज चौहान wrote 9 months ago: दीनू के आते ही हरिया ने पूछा -”क्यों दीनू क्या हुआ, डॉक्टर साहब मिले नहीं क्या ?”        … more →

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फ़ुलवा चारपाई पर पडी प्रसव पीडा से कराह रही थी |

विजय-राज चौहान wrote 9 months ago:   ******* सावन का महीना था और बारिश का मौसम चल रह था ।फ़ुलवा चारपाई पर पडी प्रसव पीडा से कराह रही थी … more →

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मोहिनी के पैर नशे में लड़खड़ा रहे थे |

विजय-राज चौहान wrote 9 months ago:   ******* रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजने को जा रहे थे , मिस्टर चढ्ढा और रूबिया दोनों घर आ चुके थे और … more →

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प्रश्न

Alok Pandey wrote 10 months ago: मैं अपने उपन्यास के लिए तीन नाम सोच रखा है। कौन सा नाम सबसे उपयुक्त एवं आर्कषक होगा । अगर आप लोग मेर … more →

दीनू खाना खा कर जाकर चारपाई पर लेट जाता है कुछ देर बाद फुलवा भी चली आती है |

विजय-राज चौहान wrote 10 months ago: दीनू चिलम लेकर आ जाता है | वह उसे हुक़्क़े पर रख देता है तो दोनों हुक्का गुडगुडाने लगते है | दीनू कु … more →

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दीनू हुक़्क़े से चिलम उठा कर चिलम भरने चला जाता है |

विजय-राज चौहान wrote 10 months ago: पारो छप्पर में बैठी चूल्हे पर खाना बना रही थी |छोटा बालक भारत बहार नीम के पेड़ पर पड़े झूले में सो रह … more →

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१५ अगस्त पर विशेषः(हिन्दी के विरोध का कोई भी आन्दोलन राष्ट्र कि प्रगति में बाधक है |)

विजय-राज चौहान wrote 11 months ago: मित्रों आपके सामने अपने प्रकाशित उपन्यास “भारत/INDIA” से पेज १५६-१५८ तक के कुछ अंश जो मु … more →

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सुखिया किचन के बहार जमीन पर बैठकर खाना खा रही थी

विजय-राज चौहान wrote 11 months ago: रूबिया-”क्योंजी कोई अच्छा सा नाम बताओ ना , जो हम अपने राजा बेटे का रख सके “| चढ्ढा साहब … more →

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